Tuesday, 14 August 2012
Tuesday, 24 July 2012
अपने सैनिकों के हाथों ही मारे गए नोल ढेंगा
निज प्रतिनिधि, (जमुई) सिमुलतला : अपने आस्तित्व को बचाने की अंतिम
लड़ाई लड़ रहा है सिमुलतला का नोल ढेंगा राजबाड़ी। कभी सैलानियों का पसंदीदा
स्थल होता था राजबाड़ी लेकिन चंद चोरों के कारगुजारी के कारण यह ऐतिहासिक
महल अपनी अंतिम गिनती का इंतजार कर रहा है। बंगला के दर्जनों फिल्म की
शूटिंग इस महल में हुआ है। जिसमें मुख्य रुप से दादाकीर्ति, भालोवासा , ओरा
चार जोन, पोदभूला आदि। स्थानीय लोगों की मानें तो स्वतंत्रता संग्राम के
दौरान देश भक्तों की गुप्त बैठकों का स्थल भी रहा है यह महल। बंगला देशी
राजा नोल ढेंगा कभी आनंद बिहार के लिए यह महल बनवाया था। चारो ओर
ऊंची-ऊंची चहारदिवारी से घिरा इस महल में घोड़े, हाथी के रहने के लिए
अलग-अलग घर बना है। वहीं महल के अंदर साइड में रसोईया अन्य प्रसाधन के घर
भी बने हैं। महल के पूर्व व पश्चिम दिशा में बनी सीढि़यां इस महल को और चार
चांद लगाता था लेकिन महल में लगे इंगलैंड के लोहा का बीम ही इस महल के काल
के रुप में इसकी लीला समाप्त करने की गाथा लिखी। इस बीम पर क्षेत्र के
चोरों की नजर लग गई और फिर क्या देखते-देखते यह महल खंडर में तब्दील हो
गया। इसके बाद महल कम भूत बंगला च्यादा नजर आने लगा। वयोवृद्ध एवं सेवा
निवृत्त शिक्षक लाल बहादुर सिंह बताते हैं कि हमारे पूर्वजों ने बताया कि
लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व से भी च्यादा नोल ढेंगा राजबाड़ी का निर्माण अवधि
है। स्वतंत्रता संग्राम में बांका जिले के हीरायडीह के स्वतंत्रता सेनानी
बाबू लाल सिंह, हकीम सिंह, छोटे लाल सिंह के अलावा देश के नामी गिरामी
स्वतंत्रता सेनानी इस राजबाड़ी में देश की स्वतंत्रता हेतु 1947 से पूर्व
गोपनीय बैठक किया करते थे। राजा के मृत्यु के संदर्भ में श्री सिंह बताते
हैं कि राजा अपने सैनिक के हाथ से ही मारे गए। क्योंकि राजा फरमान था कि
अगर तीन आवाज देने के उपरांत सामने वाला आवाज न दे तो आप गोली चला दीजिए।
इसी बीच राजा कहीं से आ रहे थे। महल में प्रवेश करने के दौरान सैनिकों ने
तीन बार रूकने का आवाज दिया परंतु राजा ने कोई जवाब नहीं दिया । सैनिकों ने
दुश्मन समझकर गोली चा दी और इसी तीन आवाज के चक्कर में राजा की मौत हो गई।
Sunday, 22 July 2012
सब्जी मंडी के रूप में पहचान बना रही सिमुलतला
सिमुलतला, (जमुई) निज प्रतिनिधि : फलों व सब्जियों का एक बड़ा मंडी के रुप
में अपनी पहचान बना रहा है सिमुलतला। इन दिनों सिमुलतला के हाट में कटहल की
बिक्री जोरों पर है। खरीदार विभिन्न शहरों से सिमुलतला आ रहे हैं। कटहल
व्यवसायी भरत यादव, लटन मियां, मो. मुख्तार, बबलू साव, मानिक सिंह आदि कहते
हैं कि सिमुलतला का कटहल का अपना एक अलग पहचान एवं स्वाद है। एक किलो से
लेकर पचास किलो तक के कटहल सिमुलतला में उपलब्ध है। जिसकी कीमत पांच रुपए
से लेकर 150 रुपए तक का है। लखीसराय से आए खरीदार लखन मोकामा के वद्री
रतनपुर के उपेन्द्र साव कहते हैं कि हमलोगों के क्षेत्र में कटहल का पेड़
बहुत कम उपलब्ध है इसके अलावा सिमुलतला कटहल का स्वाद ही कुछ अलग है और दाम
में भी बहुत किफायती होने के कारण हमलोग यहां से कटहल व अन्य सीजनों में
आम, जामुन, पपीता, अमरुद, सब्जियों में सूटी, टमाटर, आलू, प्याज, गोभी
बंधा, फूल बैगन आदि सामान ले जाते हैं। सिमुलतला क्षेत्र में आम के कुल 45
प्रजातियां, कटहल के चार-पांच, जामुन के 3-4, पपीता के 2-3, अमरुद के 6-7
के अलावा सब्जियों के दर्जनों प्रजातियां उपलब्ध हैं। सिमुलतला स्टेशन
मैदान में सप्ताह के हर एक गुरुवार एवं रविवार के हाट में सूबे के लखीसराय,
पटना, मोकमा, देवघर, हाथीदह, खगड़िया, आरा आदि शहरों के व्यापारी यहां से खरीदारी को पहुंच रहे हैं।
रहमत और बरकत का रास्ता खोलता है रमजान
जागरण प्रतिनिधि, जमुई : पवित्र रमजान का महीना प्रारंभ हो चुका है।
मुस्लिम सम्प्रदाय के लोग अल्लाह की इबादत में मशगूल हैं। रोजेदार पांचों
वक्त की नमाज अदा कर रहे हैं। शाम में अजान होने के बाद इफ्तार शुरु हो
जाती है। ऐसी मान्यता है कि रमजान के महीने में ईश्वरीय रहमत के दरवाजे खुल
जाते हैं। शुक्रवार की रात्रि चांद के दीदार के साथ ही पवित्र रमजान का
महीना शुरु हो गया था। मुसलमान भाई मानते हैं कि सिर्फ भूखा प्यासा रहना ही
रोजा नहीं है। रोजे का मतलब बुरी बातों की ओर जाना तो दूर उसके बारे में
सोचना भी गुनाह होता है। रमजान में तरावीह पढ़ी जाती है। तरावीह की नमाज 20
रेकअत की होती है जिसे पूरे माह लोग पढ़ते हैं। शहर के मुसलमान कुछ भाई
रमजान पर अपनी प्रतिक्रिया कुछ यूं दिया। मो. जैनूल कहते हैं कि रमजान का
महीना अल्लाह की इबादत के साथ-साथ रहमत और बरकत के रास्ते भी खोलता है। इस
महीने में गलत कार्यो से लोग दूर होते हैं। मो. शमीम खां कहते हैं कि रमजान
का रोजा सबों का फर्ज है। रोजा हमें हर बुलाईयों से दूर कर अल्लाह के करीब
लाता है। वे कहते हैं कि रोजा हमें अपने मकसद और फर्ज को सिखलाता है। मो.
इश्तलाक कहते हैं कि रमजान में इलाकों की रौनक बढ़ जाती है। सेहरी से
इफ्तार तक का समय हमें उन गरीबों की याद दिलाता है जो भूख का एहसास करते
हैं। इस एहसास को बहुत करीब से अनुभव करना सिखाता है। मो. हरुद्दीन रशीद
कहते हैं कि रमजान हमें तप सिखलाता है। रोजा आत्मा में अच्छाई व सदभावना को
जगाने की प्रकिया है। रोजा के दौरान हर इंद्रियों को वश में रखना जरुरी
है। मो. जमशेद अंसारी कहते हैं कि रमजान की सबसे बड़ी नेअमत कुरान है। रमजान
में ही शव-एक क्रद वाली रात आती है जो बेहतरी का होता है। उस रात अल्लाह
रहमतों की बरसात करते हैं
Thursday, 12 July 2012
आस्था का केंद्र है बूढ़ानाथ शिव मंदिर
निज प्रतिनिधि, गिद्धौर : गिद्धौर बाजार के मुख्य मार्ग से बीस गज की
दूरी पर स्थिति प्राचीन बूढ़ानाथ शिव मंदिर आज भी भक्ति व आस्था का केंद्र
बना हुआ है यहां सालों भर इस इलाके के सैकड़ों शिवभक्त श्रद्धालु भगवान शिव
की पूजा एवं अराधना में जुटे रहते हैं। खासकर सावन के महीने में सुबह से ही
शिव भक्तों की भीड़ लग जाती है तथा हर-हर महादेव की गूंज से सारा वातावरण
भक्तिमय हो उठता है। गिद्धौर राज रियासत के सैकड़ों वर्ष पूर्व स्थापित
बूढ़ानाथ शिव मंदिर के बारे में पतसंडा ग्राम के कोई भी बूढ़े या बुजुर्ग
यह नहीं बता पा रहे हैं कि इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना एवं मंदिर का
निर्माण किसने करवाया था लेकिन इतना जरुर है कि जो भी शिव भक्त इस शिव
मंदिर में आस्था व विश्वाप के साथ आते है उनकी मुरादें पूरी होती है। शिव
भक्त 70 वर्षीय नंद कुमार मिश्रा, 65 वर्षीय कारे लाल गुप्ता, 80 वर्षीय
नागेश्वर रावत बताते हैं कि यह मंदिर किसने बनवाया यह मेरे बाप-दादा भी
नहीं जानते थे कि बूढ़ा नाथ मंदिर का निर्माण कैसे हुआ। ग्रामीणों का मानना
है कि आज से हजार वर्ष पूर्व इस जंगल में तप कर रहे किसी सिद्ध पुरुष के
द्वारा शिवलिंग की स्थापना व बूढ़ानाथ मंदिर का निर्माण किया गया है जो आज
भी इस इलाके के लोगों के लिए अखंड विश्वास व श्रद्धा का केन्द्र बना है।
Monday, 9 July 2012
सावन की पहले सोमवारी पर शिवालयों में उमड़ी भीड़
जागरण प्रतिनिधि, जमुई : सावन के पहले सोमवारी पर शिव भक्तों ने
भोलेनाथ पर जल चढ़ाया और पूजा-अर्चना कर सर्वमंगल कामना की। कल्याणपुर
स्थित किउल नदी के हनुमान घाट से सैकड़ों भक्तों ने जल भरकर महादेव सिमरिया
स्थित बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर में जाकर जलाभिषेक किया।
निज प्रतिनिधि बरहट : हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा पत्नेश्वर धाम गुंजायमान हो गया। शिवभक्त बोलबम के जयघोष के साथ पत्नेश्वर स्थित शिवालय पर जाकर जलाभिषेक किया।
निज प्रतिनिधि, खैरा : सावन के पहले सोमवारी पर खैरा प्रखंड के सभी शिवालयों में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। शिव भक्तों ने स्नान के बाद भक्तिभाव से भगवान शंकर व माता पार्वती की पूजा-अर्चना की। प्रखंड के गिद्धेश्वर स्थान, घनवेरिया शिव मंदिर, खैरा राजवाटी मंदिर, श्रृंगारपुर शिवमंदिर सहित प्रखंड के सभी शिवालयों में शिव भक्तों की भीड़ देखी गई। विशेषकर महिलाओं की शिवालयों में अधिक भीड़ देखी गई। महिलाओं ने उपवास रखकर भगवान शंकर की अराधना की। इस अवसर पर शिवालयों के पास मेला भी लगा।
सिमुलतला, निज प्रतिनिधि: श्रावण की पहली सोमवारी को सिमुलतला क्षेत्र के शिवालयों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। क्षेत्र के कनौदी, ढोढरी, असहना, टेलवा, खुरंडा आदि गांवों के श्रद्धालु सुबह से ही बाबा भोले के पूजा में लीन देखे गए। मुख्य श्रद्धालुओं का भीड़ सिमुलतला बाजार के स्थित मंदिर में देखा गया जहां तड़के से महिला-पुरुष श्रद्धालु पूजा-अर्चना में खड़े दिखे।
निज प्रतिनिधि, चकाई : सावन के पहले सोमवारी पर रामचन्द्रडीह के दुखिया शिवालय पर श्रद्धालुओं ने अजय नदी में जल भर कर भगवान शंकर पर जलाभिषेक किया। इसके अलावा गोला चकाई, पहड़िया बाबा, बेसकीटांड, माधोपुर शिवालयों में भक्तों की भीड़ देखी गई।
बाक्स
शिविर में शिवभक्तों की सेवा
जमुई : सोमवार को जनप्रेरणा जमुई द्वारा बाबा धनेश्वर नाथ धाम में कांवरिया सेवा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में श्रद्धालुओं को नींबू-पानी देने के साथ ही उनका प्राथमिक उपचार भी किया गया। शिविर में मधुकर प्रसाद सिन्हा, पूर्व वार्ड आयुक्त भरत राम, मदन मंडल, बासुदेव मांझी, उपेन्द्र रजक, शंकर मंडल, ठाकुर राम, संतोष कुमार आदि ने श्रद्धालुओं के सेवा में योगदान दिया। उनलोगों ने बताया कि अंतिम सोमवारी को विशाल भंडारा का आयोजन किया गया।
निज प्रतिनिधि बरहट : हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा पत्नेश्वर धाम गुंजायमान हो गया। शिवभक्त बोलबम के जयघोष के साथ पत्नेश्वर स्थित शिवालय पर जाकर जलाभिषेक किया।
निज प्रतिनिधि, खैरा : सावन के पहले सोमवारी पर खैरा प्रखंड के सभी शिवालयों में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। शिव भक्तों ने स्नान के बाद भक्तिभाव से भगवान शंकर व माता पार्वती की पूजा-अर्चना की। प्रखंड के गिद्धेश्वर स्थान, घनवेरिया शिव मंदिर, खैरा राजवाटी मंदिर, श्रृंगारपुर शिवमंदिर सहित प्रखंड के सभी शिवालयों में शिव भक्तों की भीड़ देखी गई। विशेषकर महिलाओं की शिवालयों में अधिक भीड़ देखी गई। महिलाओं ने उपवास रखकर भगवान शंकर की अराधना की। इस अवसर पर शिवालयों के पास मेला भी लगा।
सिमुलतला, निज प्रतिनिधि: श्रावण की पहली सोमवारी को सिमुलतला क्षेत्र के शिवालयों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। क्षेत्र के कनौदी, ढोढरी, असहना, टेलवा, खुरंडा आदि गांवों के श्रद्धालु सुबह से ही बाबा भोले के पूजा में लीन देखे गए। मुख्य श्रद्धालुओं का भीड़ सिमुलतला बाजार के स्थित मंदिर में देखा गया जहां तड़के से महिला-पुरुष श्रद्धालु पूजा-अर्चना में खड़े दिखे।
निज प्रतिनिधि, चकाई : सावन के पहले सोमवारी पर रामचन्द्रडीह के दुखिया शिवालय पर श्रद्धालुओं ने अजय नदी में जल भर कर भगवान शंकर पर जलाभिषेक किया। इसके अलावा गोला चकाई, पहड़िया बाबा, बेसकीटांड, माधोपुर शिवालयों में भक्तों की भीड़ देखी गई।
बाक्स
शिविर में शिवभक्तों की सेवा
जमुई : सोमवार को जनप्रेरणा जमुई द्वारा बाबा धनेश्वर नाथ धाम में कांवरिया सेवा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में श्रद्धालुओं को नींबू-पानी देने के साथ ही उनका प्राथमिक उपचार भी किया गया। शिविर में मधुकर प्रसाद सिन्हा, पूर्व वार्ड आयुक्त भरत राम, मदन मंडल, बासुदेव मांझी, उपेन्द्र रजक, शंकर मंडल, ठाकुर राम, संतोष कुमार आदि ने श्रद्धालुओं के सेवा में योगदान दिया। उनलोगों ने बताया कि अंतिम सोमवारी को विशाल भंडारा का आयोजन किया गया।
Friday, 6 July 2012
जमुई की बिटिया पूजा बिहार में टॉपर
निज प्रतिनिधि, झाझा (जमुई) : जमुई जिले की पूजा वर्णवाल ने बिहार
संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा 2012 में प्रथम स्थान लाकर सूबे सहित
अपने जिले का नाम रोशन किया है। झाझा शहर के पुरानी बाजार निवासी डॉ. ओंकार
वर्णवाल की 18 वर्षीया पुत्री पूजा की इस उपलब्धि से झाझा व जमुई वासियों
में खुशी की लहर दौड़ गई। पूजा के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा है।
उसकी मां शशि वर्णवाल अपनी बेटी की उपलब्धि पर फूले नहीं समा रही हैं। इस
खुशी के मौके पर सूबे के भवन निर्माण मंत्री दामोदर रावत ने कहा कि नीतीश
कुमार ने जो सपना लड़कियों की शिक्षा के लिए देखा है वह अब झाझा-जमुई की
धरती पर सच होता दिख रहा है। इसके लिए पूजा व उसके माता-पिता बधाई के पात्र
हैं।
झाझा में जन्मी पूजा नर्सरी से क्लास टू तक की पढ़ाई संत जोसेफ में की। डीएवी जामताड़ा में उसने क्लास दो से दस तक की पढ़ाई पूरी की। 10वीं में पूजा ने 96 फीसद और प्लस टू में 88 फीसद अंक हासिल की। इसके अलावा पूजा ने एएफएमसी पूणे, एआईपीएमटी एवं केएमसी मणिपाल की परीक्षा दी थी। उक्त सभी परीक्षाओं में उत्तीर्ण होते हुए बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता में पूरे बिहार की टॉपर रही। पूजा को बधाई देने वालों में जदयू के जिलाध्यक्ष ई. शंभू शरण, डॉ. अभय सिंह, डॉ. रुपा सिंह सहित कई बुद्धिजीवी शामिल हैं।
झाझा में जन्मी पूजा नर्सरी से क्लास टू तक की पढ़ाई संत जोसेफ में की। डीएवी जामताड़ा में उसने क्लास दो से दस तक की पढ़ाई पूरी की। 10वीं में पूजा ने 96 फीसद और प्लस टू में 88 फीसद अंक हासिल की। इसके अलावा पूजा ने एएफएमसी पूणे, एआईपीएमटी एवं केएमसी मणिपाल की परीक्षा दी थी। उक्त सभी परीक्षाओं में उत्तीर्ण होते हुए बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता में पूरे बिहार की टॉपर रही। पूजा को बधाई देने वालों में जदयू के जिलाध्यक्ष ई. शंभू शरण, डॉ. अभय सिंह, डॉ. रुपा सिंह सहित कई बुद्धिजीवी शामिल हैं।
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